जब दिखावे में प्यार ऐसा था
तो हकीकत का मंजर क्या होता है
आंसू निकलते थे आंखों से उसकी
पत्थर का दिल भी क्या हो गा
वह कहते थे छोड़कर ना जाना मुझको
छोड़कर गए वह मजबूरी क्या होगी
रोता हूं जाकर गलियों में उनके
दर्दे दिल की शिकायत क्या होगी
दर्द से दिल का दिल से दर्द का रिश्ता सरेआम ना हो जाए
बेनाम से इस दर्द का दासता क्या होगी
सूखे पत्तों की तरह छोड़ कर चल दिया उसने
मेरे मालिक तू आग लगा दे मुझ में तो खुशियां क्या हो
तो हकीकत का मंजर क्या होता है
आंसू निकलते थे आंखों से उसकी
पत्थर का दिल भी क्या हो गा
वह कहते थे छोड़कर ना जाना मुझको
छोड़कर गए वह मजबूरी क्या होगी
रोता हूं जाकर गलियों में उनके
दर्दे दिल की शिकायत क्या होगी
दर्द से दिल का दिल से दर्द का रिश्ता सरेआम ना हो जाए
बेनाम से इस दर्द का दासता क्या होगी
सूखे पत्तों की तरह छोड़ कर चल दिया उसने
मेरे मालिक तू आग लगा दे मुझ में तो खुशियां क्या हो
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