आज फिर जिंदगी से किया एक वादा तोड़ जाऊंगा
गर शाक्की तुझे मुँह से न लगाया तो शायद मर जाऊँगा
न करो मेरी फिक्र ऐ दुनिया वालो हवा का झोंका हूँ ,
न ठहरा हूँ न ठहर जाऊंगा
मेरी पहचान भी मेरे जाने के बाद ही निखरेंगी
अलविदा कहते कहते अपनी शायरी दे जाऊंगा..!
गर शाक्की तुझे मुँह से न लगाया तो शायद मर जाऊँगा
न करो मेरी फिक्र ऐ दुनिया वालो हवा का झोंका हूँ ,
न ठहरा हूँ न ठहर जाऊंगा
मेरी पहचान भी मेरे जाने के बाद ही निखरेंगी
अलविदा कहते कहते अपनी शायरी दे जाऊंगा..!
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